पहचान तो मेरी वही है बस पहचानने वाला कोई और है
धीरे-धीरे सुलगती पहचान मेरी ना बनी आतिश
ना धुआं बन गुम होती है
ये सजा है मेरी
ये गुनहा कोई और है
है मेरी पहचान क्या
ये बात कोई और है ।
मुझे मेरी पहचान ख़ुद नही उन खामोशियों,तनहाइयों ने
मुझको अपनी पहचान दी है
हालात क्या थे? मजबूरियां कौन सी थी ? किस्मत कैसी थी ?
मुझे क्या पता ये सवाल कोई और हैं
है मेरी पहचान क्या
ये बात कोई और है ।
जिंदगी के सफर मे हजारों चहरे मिले-जुले,पहचान हुई
पर अब कोई वास्ता नही,पाँव तो अपनी जगह हैं पर
अब कोई रास्ता नही
बदलती दुनिया के साथ पहचान बदली,जिस्म तो वही है
पर अब रूह कोई और है
है मेरी पहचान क्या
ये बात कोई और है ।
इतने आंसू बहा लिए कि मेरी पहचान भी बह गई वक़्त
के उस दरिया में
अब मैं हालात के बहाव में बहता हूं,थाम लें जो मुझको
वो किनारे कोई और हैं
है मेरी पहचान क्या
ये बात कोई और है ।
नाम तलाशता हूं क्यूंकि गुमनाम हूं
पहचान तलाशता हूं क्यूंकि अनजान हूं
हालत कोरे कागज़ सी मेरी ना कोई दास्तान,
ना कोई कहानी मेरी,जो पहचाने मुझको
वो कलम कोई और है
वो कलम कोई और है
है मेरी पहचान क्या
ये बात कोई और है
ये बात कोई और है ॥







