
तनहाइयाँ बटोरती उन दीवारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
फूलों से महके गजरों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
अक्षय-मन
•«♥»• मैंने अपने आपको क्षमा कर दिया है। बन्धु, तुम भी मुझे क्षमा करो। मुमकिन है, वह ताजगी हो, जिसे तुम थकान मानते हो। ईश्वर की इच्छा को न मैं जानता हूँ, न तुम जानते हो। रामधारी सिंह दिनकर •«♥»•

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फासले हैं इतने कि उसे देखा नही कभी,एहसासों के दरमियाँआपका क्या कहना है??
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