हस्त कला के ये मंत्र
निर्जीव को भी जीवित करने के ये तंत्र
मुझे भी सिखाओ
दिल की भावनाये
कुछ अक्षय अकिर्तियाँ
मन की जिज्ञासाएं
अपनी ये हस्त कलाएं
मुझे भी बतलाओ
मोन मैं भी अमोनता
एक निर्जीव वस्तु से दिल की बात कहलवाने की तुम्हारी क्षमता हमें भी समझाओ
इनकी अमिट मुस्कुराहट से दिल लुभाती इस बनावट से
हमारी भी पहेचान कराओ
अश्रुओ से मिट्टी के मिलन का
दर्द मैं ढलकर हँसते जीवन का
एहेसास हमें भी तो कराओ
के हम अब पराई कलम हो रहे हैं ...
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*नफ़ा करते-करते भी कम हो रहे हैं.बुढ़ापे में तेवर नरम हो रहे हैं. ये दौलत
की तितली पकड़ते-पकड़ते, बहुत दूर अपनों से हम हो रहे हैं. जमा...
1 हफ़्ते पहले
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