हस्त कला के ये मंत्र
निर्जीव को भी जीवित करने के ये तंत्र
मुझे भी सिखाओ
दिल की भावनाये
कुछ अक्षय अकिर्तियाँ
मन की जिज्ञासाएं
अपनी ये हस्त कलाएं
मुझे भी बतलाओ
मोन मैं भी अमोनता
एक निर्जीव वस्तु से दिल की बात कहलवाने की तुम्हारी क्षमता हमें भी समझाओ
इनकी अमिट मुस्कुराहट से दिल लुभाती इस बनावट से
हमारी भी पहेचान कराओ
अश्रुओ से मिट्टी के मिलन का
दर्द मैं ढलकर हँसते जीवन का
एहेसास हमें भी तो कराओ
डिकोड
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पता नहीं,
तुम डिकोड कर पाई
या नहीं—
अंतिम बार
तुमसे दूर जाने से पहले
मैंने
तुम्हारी अनुमति से
तुम्हारी पीठ पर
भाषा और लिपि रहित
कुछ लिखा था।
और मैं ल...
19 घंटे पहले
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