बुधवार, 1 जुलाई 2009

ये वक़्त


कितने लोगों में अकेला नज़र आता है ये वक़्त
तनहा कितनी जिंदगियाँ जी जाता है ये वक़्त

जब हों पैरों में पत्थर,तो हाथ नही बढते
ठोकर लगे तो उठना सिखाता है ये वक़्त

प्यार-मोहब्बत में मजहब,उम्र और जात की बातें
दुआ मिलकर करोगे तुम,तो हाथ उठाता है ये वक़्त

किसी ने मेरा बचपन तो किसी ने जवानी न सुनी
सुन सको तो सुनलों हर लम्हा सुनाता है ये वक्त

लब्जों को मिल जाती है जब ख्यालों की उड़ान
सफहों सा रंगा आसमां,पंख फैलाता है ये वक़्त

"अक्षय" तेरे होंसलों को देख छुप-छुपकर
आईने में ख़ुद को निहारता है ये वक़्त

(इस तस्वीर को देख कुछ और शब्द दिल में आते हैं)

हाथों की लकीरों पर वक़्त ने कुछ सितारे लिखें हैं
काले बादलों की रात में भी जगमगाता है ये वक़्त

अक्षय-मन

39 टिप्‍पणियां:

  1. पहला दूसरा और तीसरा शेर तो इतना लाजवाब है की कई कई बार पढ़ा उन्हें फिर भी जी न भरा.....

    लगता है सदियों के अनुभवों का निचोड़ समाया है इनमे....बहुत ही सुन्दर मनमोहक रचना है....
    ऐसे ही लिखते रहें ...शुभकामनाये.

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  2. वक्त की कद्र करना , कहाँ कभी समझाता है वक्त..
    खुद से खुद को अक्सर मिलाता है वक्त....

    सुन्दर रचना...

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  3. lamha dar lamha gujarata ye wakt...............kabhi koee wakt achchha hai to koee bura...........bahut sundar

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  4. BAHOT KHUB.
    WAQT KO JEEYA HI JA SAKTA HE JAISA HO USE PAKAD K NHI RAKHA JA SAKTA.
    SUNDER ABHI VYAKTI
    SHUBKAMNAYE..

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  5. जब हों पैरों में पत्थर,तो हाथ नही बढते
    ठोकर लगे तो उठना सिखाता है ये वक़्त

    वक़्त को प्रणाम है मेरा भी............. ये वक़्त हो है जो सब कुछ सिखाता है......... लाजवाब रचना

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  6. किसी ने मेरा बचपन तो किसी ने जवानी ना सुनी,
    सुन सको तो सुनलो हर लम्हा सुनाता है यह वक़्त ....

    वक़्त ही है जो ठहरता नहीं और वक़्त ही है जो हर लम्हा यादो में सजा देता है ...
    Just gr8 Ur akshay ....! bahot ji behtarin rachnao main se hai yeh.. badhaai...

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  7. हाथ की लकीरो मे वक्त ने कुछ्सितारे लिखे हैं

    काली रात मे भी जगमगाता है ये वक्त्
    बहुत सुन्दर अद्भुत बधाई

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  8. जब हों पैरों में पत्थर,तो हाथ नही बढते
    ठोकर लगे तो उठना सिखाता है ये वक़्त
    बहुत ही सुंदर आप की यह गजल
    धन्यवाद

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  9. अक्षय ...फिर एकबार तुमने गज़ब ढाया है ..!' वक़्त' पे लिखी गयी ऐसी रचना ..मैंने शायदही कहीँ पढी हो ..!
    कोई ताज्जुब नहीं ,कि , तुम्हें इतनी सुन्दर टिप्पणियाँ मिल जाती हैं ...मेरा क्रमांक कहीँ नीचे रह जाता है ...!
    आदी हो चुके होगे ऐसी टिप्पणियों के ..लेकिन अलग से अल्फाज़ कहाँ से लाऊँ ?
    काश ! ये हुनर मुझ मे भी होता...!

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  10. Last sher jo aapne ne picture ke according pesh kiya hain bahut damdaar hain.

    regards,

    Priya

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  11. kitne gahre ahsaas ke sath mehsoos kiya hai tumne waqt ka dard.....sach sabke sath hote huye bhi kitna tanha hota hai waqt.......waqt ko bada balwaan kaha jata hai magar kabhi uske andar koi jhanke to pata chale tanha waqt kitna kamjor hota hai.......gazab ka likha hai.......bahut khoob.

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  12. वक्त का क्या कहें..बस, एक उम्दा रचना पढ़ने मिल गई..बहुत बधाई.

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  13. मेरे शब्दों को सोंने दो स्वर रहने दो मौन,
    वक्त की दरकार यही है "अक्षय" मेरा प्यार यही है ||

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  14. akshay,
    hamesha ki tarah tumne fir khush kar diya, bahut badhiya...
    bas likhte raho..
    ham bas aate rahenge...

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  15. किसी ने मेरा बचपन तो किसी ने जवानी न सुनी
    सुन सको तो सुनलों हर लम्हा सुनाता है ये वक्त
    bahut khoob shandar

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  16. हर इंसान को वक्त का कद्र करना चाहिए! जो वक्त निकल जाता है वो फिर लौटकर कभी नहीं आता! आपने बहुत ही ख़ूबसूरत और शानदार कविता लिखा है और साथ में बहुत ही सुंदर चित्र!

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  17. akshay ,

    mere hero .. doino din , tumhari lekhni sashakt hoti ja rahi hai ... simply waah kah doonga to kuch accha na honga .... bahut jaldi indore aakar gale lagata hoon ..

    tab tak meri tahe dil se badhai sweekar kar le beta....

    vijay

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  18. tumahari har line behtarin hoti hai .main tumahari tarif aksar apne dost se karati hoon .tum unchh star ke rachanakaar ho .kuchh kahane me bhi mujhe jhijhak hoti hai .dil ki gaharai me jo utar jaaye wo likhte ho .kabhi kitaab nikale mujhe jaroor batana .main uski pathak bananaa chahoongi .aur kya kahoon .kho jaati hoon .kuchh kaha na jaaye .

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  19. Wah Pahla misra itna sunder tha ki man wah kah utha

    chitra ke saath rachna waqayi bahut sunder bana deti hai

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  20. bahut comprehensive hai...almost har aspect ko cover kiya aapne...very intelligent creation

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  21. मेरे दोस्त तेरी तो बहुत ही गहरी सोच है! वाकई काबिले-तारीफ ! बहुत बढ़िया !

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  22. lazavaab.
    aour ye bhi kitanaa sundar blog///
    aapki rachna dil ko chhuti he, isliye kai saari padhh li aour sirf ek khyaal aayaa ki " ye blog mujhse chhoot kese gayaa thaa"
    tippani ke liye filhaal kuchh nahi kah sakta..kai saari rachnaaye he aapki jo ek saath mastishk me ghumad rahi he..sabko eksutra me piro kar baad me fir kisi nai post par tippani dunga,
    filhaal
    sirf yahi ki L A Z A V A A B

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  23. waqt ki har shah gulaam waqt ka har shah pe raaj.
    jhallevichar.blogspot.com

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  24. वक्त के वाबत बहुत अच्छी रचना

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  25. आपका ब्लॉग तो जीता जगता इन्द्रधनुष है ,
    और आपकी रचना / वक्त \ सर्वथा नवीन.......

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  26. bahut sunder likh rahe ho honey, itni baar try kiya ,note bheje per tum ne lift nahi dee.gussa ho kya?
    mera pyar lo,roj khojta hoon red light per dikhte nahi ,mujhe khushi hai ki tumhari kalum niranter gatisheel hai.bahut badhiya, shubhkamnayen.
    dr.bhoopendra

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  27. आज़ादी की 62वीं सालगिरह की हार्दिक शुभकामनाएं। इस सुअवसर पर मेरे ब्लोग की प्रथम वर्षगांठ है। आप लोगों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष मिले सहयोग एवं प्रोत्साहन के लिए मैं आपकी आभारी हूं। प्रथम वर्षगांठ पर मेरे ब्लोग पर पधार मुझे कृतार्थ करें। शुभ कामनाओं के साथ-
    रचना गौड़ ‘भारती’

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  28. WAKT BAHUT KUCHH SIKHA DETA HEY . KYA SUNDER RACHNA LIKHI HEY MUJHEY TO BALRAJ SHANI KI WAKT KI YADEY TAJA HO GAYE . ASHOK .KHATRI56GMAIL.COM

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  29. विचार तो ज़ोरदार हैं, पर अगर शिल्प पर अभी थोडी मेहनत कर ली जाए तो बेहतर होगा.

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  30. Sabhi rachnayein behad sundar hain...aap jante bhi hain ki is umra me aap kya kamaal kar rahe hain...

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  31. सुन्दर शेर.
    आपके ब्लॉग पर आकर बहुत अच्छा लगा.
    धन्यवाद!

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  32. "अक्षय" तेरे होंसलों को देख छुप-छुपकर
    आईने में ख़ुद को निहारता है ये वक़्त

    wahhhhhh!!!!!! wakt? ha sach! wakt hi to hai,

    jo kabhi khushi deta hai, kabhi gum.sundar prastuti

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