रविवार, 28 जून 2009

बूंदों की सौगात

मौसम को देखते कुछ उसका रूप शब्दों से निखारा है
हमने देखें हैं कई रंग तुम्हारे मगर ये रंग हमारा है


बरसों मेघा,बरसों मेघा
आज धरा ये प्यासी है
नील-गगन में,नील-गगन में
क्यूँ छाई गहरी उदासी है ।

झोंका पवन का आने से
पत्ता कोई शर्माता है
प्यार बरसा कर इस धरा पर
देख गगन मुस्काता है ।

भीगा फिरसे आज वो बचपन
यादों की इस बारिश में
बरसों बाद ख़ुद से मिला हूं
सावन भी है इस साजिश में ।

नीचे लिखीं कुछ पंक्तियाँ मेरे पापा के लिए जो न होकर भी मेरे साथ हैं
कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में...

नयन मेरे नम पड़े हैं
पहली इस बरसात में
हमसे दूर गए,वो बिछडे मिले हैं
बूंदों की सौगात में ।

अक्षय
-मन

25 टिप्‍पणियां:

  1. झोंका पवन का आने से
    पता कोई शर्माता है...........
    सुन्दर लिखा है अक्षय जी ...........मन को छूने वाली पंक्तियाँ है

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  2. man our aatmaa dono ko chhoo gaya.....................bahut manbhaawak..............

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  3. बहुत सुन्दर दृष्य ख़ींचा है। आपनों का जाना सदा दुखदायी होता है परन्तु जीवन हमें उनके बिना जीना भी सिखा ही देता है।
    घुघूती बासूती

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  4. अक्षय जी बहुत ही सुन्दर रचना है। भीग जाने को मन कर रहा है, और इस गर्मी में दिल क्या चाहेगा। बहुत खूब लिखा है।

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  5. बहुत सुंदर रचना ..गहराई तक भाव भरे हुए..
    हार्दिक बधाई..

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  6. अक्षय जी
    वाकई आपका मन अक्षय है जो इतने सुन्दर भावो का सृजन कर लेता है.
    बचपन को भीगने दीजिए. वाह --

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  7. बहुत सुन्दर शब्द चित्र खीचा है।बधाई।

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  8. megh ko bhi barasne per majbur kar de esi rachna hai... badhai..!

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  9. akshay papa ke liye likhi lines ankhe nam kar gayee...
    barish ki sakhat jarurat hai ab to bars jaye

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  10. itni sahajta se apne man ke udgaaron ko kaise vyakt kar lete hain?....mere liye to ye mushkil hai....bahut hi gahri baaten hain.

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  11. बहुत अच्छी रचना, अब तो मांगें सब बारिश ही बारिश

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  12. wah Akshay wah! Barish mein kiska man nahi machalta...aur han jo line aapne apne Papa to dedicate ki hain bahut pyari hain

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  13. अक्षय जी आपने बहुत ही सुंदर रचना लिखा है और उतनी ही सुंदर बूंदों की तस्वीर! आपकी रचना दिल को छू गई!

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  14. बहुत अच्छा लिखते हो अक्षय...
    इश्वर से कामना है ऐसे ही लिखते रहो और नाम कमाओ...
    मीत

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  15. aksahy

    mere bete , mere paayre se hero .. aaj kuch na kahunga .. bus ..aaj teri rachnao ko padhkar man bheeg sa gaya hai ..

    yaar , chal teri lekhni ko ek salaam to kar doon ...

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  16. Akshay,
    Tumharee harek rachna mujhe nishabd kar detee hai...vilakshan pratibha ke dhanee ho..!
    Anek duaon aur shubhkanaon sahit
    shama

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  17. bahut hi pyari rachna.......wakai boondon ki saugaat lekar aayi hai........dharti ki pyas bhi bujha gayi.

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  18. tumahari rachana lagata hai padhati rahoon .aur phir khamosh ho jaati hoon .sare tasvir bhi tumaahari bohat kuchh bolati hai aur byan bhi karati hai .ek hi baat ko kya doharau .bas aane ka saboot deti hoon .aur badhai bhi .

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  19. ZINDAGI KI SAMAA KA YAHAN JALAEIN RAKHNA DOSRON KE JIWAN SADA BACHEIN RAKHNA YE DUNIYA TERE SATH HO NA HO PERDUNIYAN ME APNA NAAM BANAEIN RAKHNA? ANU

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  20. EK PYAR THA EK PYARI THI DONO KI DOSTI BAHUT NYAARI THI JISS DIN SE HUA THA PYAR UNHEIN US DIN SE UNKI KISMAT BAHUT DULARI THI KHUDA BHI UNSE BOLA YE KAUN SI YAARI THI NA SADI KI NA BACHEIN HUEIN YE KOUN SI DOSTI YARI THI?AGAR KOI ISS RISTEIN KA NAAM BATHEIN TOH MEIN JANU KYUNKI KHUDA BHI ISS RISTEIN KA NAAM NAHI JANTA?AAP ME SE KOI HAI--TOH MAIL KAREIN--DINESH.LOVE01@GMAIL.COM

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