सोमवार, 15 जून 2009

बेपनाह रिश्ते और बुरे वक्त की एक खास बात....


मेरे इस दिल में तुम्हारा कुछ समान पड़ा है
कुछ यादें,कुछ जज़्बात और टूटे-फूटे से कुछ
एहसास...जिनपर बेदर्द इस वक्त की गर्द जमी पड़ी है
अब मैं चाहता हूं ये गर्द,ये यादें हमेशा के लिए इस बेरूह जिस्म के साथ
अपना दम तोड़ दें फ़ना हो जायें और तुम एक रात का अधूरा ख्वाब बनकर इन अंधेरों में हमेशा के लिए खो जाओ......
मैं जानता हूं वक्त मेरे लिए कभी नही बदलेगा और न तुम...मैं ही बदल जाउंगा अब तुम्हारे लिए,इस वक्त इस ज़माने के लिए ...
कसूर न मैं अपना मानता हूं न तुम और माने भी क्यूँ...
क्यूंकि हम एक दुसरे की दुःख तकलीफ तो समझते हैं
लेकिन जिस ज़िन्दगी में ये दुःख तकलीफ हैं
वो ज़िन्दगी ही नही समझ पा रहे हैं...
कुछ मजबूरियां हैं तुम्हारी जो मुझे कई बन्धनों में बाँध देती हैं
और ये बंधन भी कैसे जिनका कोई नाम कोई पहचान नही...
जानती हो हमारा रिश्ता अनाथ हो गया ये लावारिस और
बेपनाह हो गया...जो गुजरे वक्त के साथ न जाने कौन सी
गुमनामियों में खो गया....

मगर एक बात है जो मुझे अब भी सुकून देती है कुछ होंसला देती है वो
ये कि बुरे वक्त में भी एक खास बात होती है कि वो भी गुज़र जाता है.....अक्षय-मन

22 टिप्‍पणियां:

  1. ये वक्त की खासियत है..अच्छा या बुरा-गुजर ही जाता है. बढिया लिखा.

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  2. बहुत शानदार बात कही है आपने। अच्‍छी लगी यह सकारात्‍मक सोच।

    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

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  3. बुरे वक्त की भी एक खास बात होती है , वो भी गुज़र ही जाता है ,

    वाह वाह .....
    बहुत बढ़िया.....
    बहुत अच्छा लिखते हो तुम, बस ऐसे ही ऊँची सोच के साथ लिखते रहो, तुम्हारी लेखनी में सरस्वती जी का वास हमेशा रहे

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  4. पहली बात तो ये की आपका ब्लॉग बड़ा ही खूब्सूरत है..doosraa ये की आपकी lekhanee उसे और भी prabhaavshaalee banaatee है.

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  5. बहुत सुन्दर लिखा है आपने अक्षय जी और जो चित्र लगाया है...वाह..जितनी तारीफ की जाए कम है...
    नीरज

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  6. प्यार मे कथन कुछ इसी तरह के निकते है ......एक खुश्बू लिये रचना

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  7. bahut acchi abhivyakti.. Tumhaari lekhni sidhe shabdo main bahut kuch keh jaati hai...!

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  8. वक़्त अपनी रफ़्तार से अच्छा बुरा दिखाता चलता ही जाता है ..बहुत अच्छा लिखा है आपने .

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  9. akshay , sahi hai ,,waqt to gujar jaata hi hai ...par beetate hue dino ki kashish rah jaati hai ...

    is sajiv chitran ke liye tuje badhai ..

    vijay
    pls read my new sufi poem :
    http://poemsofvijay.blogspot.com/2009/06/blog-post.html

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  10. deere saver ............ vaqt तो guzar ही जाता है...... बस कुछ kadvee meethi yaaden रह जाती हैं........ बहूत लाजवाब लिखा है

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  11. कैसा भी पल हो उसे तो गुज़रना ही है
    सुन्दर रचना

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  12. ek jivant lekhan..........jaise kitne dard ko pikar jazbaat kagaz par ukere gaye hon.bahut hi badhiya.

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  13. Hamesha achhahee likhte hain aap..iske alawa aur kya kahun?
    har guazarte minute me 60 second hote hain, lekin gamgeen waqt guzaare guzarta nahee, aur khush gawaanr samay, palak jhapaktehee guzar jaata hai...Kin lamhon me ham zindagee basar karte hain? kahan kahan bant jaate hain, kaun samajh saka hai?

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  14. Akshya.. aapka ye lekh gulzaar saa'b ke song "mera kuch samaan tumhare pass pada hain" ki yaad dilata hain......" bura waq bhi guzar jata hain ye antim panktiya ise aur jaandar banati hain...bahut sunder

    Mubarak ho!

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  15. बहुत ही सुंदर भाव के साथ आपने ये ख़ूबसूरत और उम्दा रचना लिखा है जो काबिले तारीफ है और उसके साथ बेहद सुंदर तस्वीर! आप सिर्फ़ अच्छा लिखते ही नहीं बल्कि आपने अपने ब्लॉग को इतनी खूबसूरती से सजाया है कि मेरे लिए आपका ब्लॉग "द बेस्ट" है!

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  16. aapki presentation me bhi ek khaas baat hoti hai...shabd jaise bilkul feel hote hai....aur saath me likha bhi itna pyaara hai...gehri soch,hamesha ki tarah

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  17. bahut ahchchey se apne bhaavon ko prastut kiya hai...

    ankhon se bahtey aansoo...ka chitr aap ki rachna ka purak ho gaya hai...toote/anaath hue rishton ka dard kavita samete hue hai...

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  18. bahut khub likha..sundar prastuti...
    waqt achha ho ya bura....kat hi jata hai....dheeraj rakhna chahiye bas.....
    man khush hua ye rachna padh ke....

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  19. MN KO CHHU LENE WALI LAINE'N LIKHI'N HAI'N.
    AAJ BHI INTA ACHCHHA LIKHA JA RHA HAI.JAN KR MN GD-GD HUA.
    ASHESH BADHAIYA'N SWEEKAR KRE'N .
    -ASHUTOSH MISHRA

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  20. दो ही शब्द जेहन में आ रहें हैं
    दिव्य और अदभुत..............

    साधुवाद

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