सोमवार, 1 जून 2009

लुत्फ-ए-शराब

मैंखाने में आज मैकशों की कोई कमी नही
ये आब-ए-हमदर्द पीकर देखूं तो कुछ हुआ

उसकी नशीली आंखें साकी जो बनी हैं आज
हर नज़र से मिले दो जाम,पीकर देखूं तो कुछ हुआ

आईने भी अब लड़खड़ाते हैं मुझे देख-देखकर
हर आईने से जाम टकरा पीकर देखूं तो कुछ हुआ

मेरे लबों को छुने से पहले हर बूंद वो पाकीजा होगी
मैं चूम-चूम हर पैमाना पीकर देखूं तो कुछ हुआ

टूटा हुआ पैमाना हर बार क्यूँ आता है मेरे नसीब में ?
धीरे-धीरे,छलके जाम जो पीकर देखूं तो कुछ हुआ ।
अक्षय-मन

16 टिप्‍पणियां:

  1. KHUB LIKHE HO MIYAA BAHOT KHUB ADAAYAGI HAI... DHERO BADHAAYEE ISKELIYE


    ARSH

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  3. Bhai sahab maza aa gaya padhkar....yadi aapki permission ho to kya mai isko apna gmail status bana sakta hoon

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  4. इतनी अच्छी अभिव्यक्ती मै अभी तक ब्लोग पर कही नही पढा........बहुत खुब ऐसे ही लिक्ते रहिये

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  5. हेडिंग में तुफ्त-ए-शराब लिखा है, जबकि लुत्फ-ए-शराब होना चाहिए।

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  6. hey.. hi
    last 2 lines are really very nice.. :)
    keep writing..

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  7. बेहतरीन रचना, आनन्द आ गया.

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  8. टूट हवा पैमाना..............लाजवाब शेर बन पडा है.......... नशे में उतर कर लिखी मदहोश रचना है

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  9. kya baat hai hero... kahan jaa rahe ho.. bahut dino baad laute ho aur ye tevar ...hmmmmmmmmmmm.... ab to pakka hi indore aana padhenga jaanne ke liye ki ye nashili aankhen kiski hai ....

    kya chal raha hai bhai ....

    well, bahiut sundar rachana ... umar kahiyaam ki runbaiyaan yaad aa gayi hero.. agar ye kahun ki aapka lekhan pahle se jyada shaandar ho gaya hia to koi atishyokti nahi hongi ...

    dil se badhai

    [ phir bhi ye nashili aankhe kiski hai yaar ]

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  10. दिल को छू लेने वाली और मदहोश कर देने वाली रचना लिखा है आपने!

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