बुधवार, 10 जून 2009

ऐ गुस्से,नखरे वाली सुनो.....

जिस वक्त तुम इस आईने में ख़ुद को देखा करती हो
उस वक्त तुम मुझसे कम ख़ुद से ज्यादा मोहब्बत करती हो :)

अरे ! रहम करो,मेहरबानी करो,गुनाह हमारा है तो हमसे कहो
हम बन्दे हैं खुदा के और तुम खुदा से ही शिकायत करती हो

हकीक़त में तो हमने तुम्हे भुला दिया है बरसो-सालों से
मगर ख्वाबों में -आकर तुम फिर से शरारत करती हो

ऐ गुस्से,नखरे वाली सुनो,दिलसे ज़रा तुम काम तो लो
हम अनजाने चुप से बैठे हैं,देखें कितनी नफरत करती हो :)
अक्षय-मन

21 टिप्‍पणियां:

  1. इतना दर्पण न ज्यादा निहारा करो

    मेरी आँखो मे खुद को सवारा करो

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  2. बहुत सुन्दर भाव पूर्ण अभिव्यक्ति

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  3. "us waqt tum mujhse zyada khud se mohabbat karti ho" mere hissab se kavita ke flow me ye line doosri line ki jagah par zyada suitable lagegi....iske alaawa rachna kaafi achhi hai

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  4. बहुत शानदार रचना। भई आप तो प्रेम रस के माहिर कवि जान पड़ते हैं। मैं हमेशा पढ़ता हूं आपको। बहुत कम स‌मय में बहुत अच्छी अच्छी रचनाएं पढ़ाते हैं आप। धन्यवाद।

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  5. बहुत अच्छा लिखा है आपने, प्रेम की अच्छी अभिव्यक्ति है......
    बस ऐसे ही लिखते जाइये
    http://swapnamanjusha.blogspot.com/

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  6. akshay , kya baat hai is baar to andaaz hi juda hai likhne ka..............bahut badhiya........ek alag hi nazariya

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  7. मैं तो कहूँगी रोचक। एक नया अन्दाज है।
    घुघूती बासूती

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  8. पहले तो मैं आपका तहे दिल से शुक्रियादा करना चाहती हूँ की आपको मेरी शायरी पसंद आई!
    आप का हर एक ब्लॉग एक से बढकर एक है! मुझे बेहद पसंद आया आपका ये ब्लॉग! जितनी ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने उतनी ही खूबसूरती से ब्लॉग को सजाया है जो काबिले तारीफ है!

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  9. akshay ...........beta padhai ..kaam dhanda sab khuch bhool gaye ho ..aur kiski mohabbat me fanse ho .... aaj kal bahut kuch isis tarah ka likh rahe ho ......dekh raha hoon ki tum bigad rahe ho..... lagta hai ishq me pad gaye ho ....jai ho jai ho...

    are ....ye sab likhna band kar de.... mujhe competition se dar lagta hai bhai...........

    chalo mazak kar raha tha.. acha likha hai beta aur jo sabse acchi baat hai ,wo ye hai ki ek single emotion ko hi snlarge kiya hai ... very good...

    meri taraf se aaj mithai kha lena...

    badhaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

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  10. बहुत ही सुंदर जबाब नही भई आप की शायरी का,बस वाह वाह ही निकल रही है दिल से.
    धन्यवाद

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  11. aapke khubsurat vicaaron ne saahity ki bhook se trpt kr diya agr hmen aap jese saahitykaar ke alfaazon vichaaron ka roz naashta or khaana mil jaaye to kyaa khna ab hm aapke hr lekh kvita ke intizaar men plakpaavne bichaa ke bethe hen akhtar khan akela kota rajasthan

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