शुक्रवार, 13 नवंबर 2009

कोरा इतिहास

कितनी तन्हाई,कितने थे आंसू कितना उदास था मैं
तुझसे बिछड़ के तू ही बता दे कितना पास था मैं

चाँद भी,आसमा भी और हैं सितारे सब वहां
तेरी धरती पर फलक की अनबुझी प्यास था मैं

वो आँगन,वो दीवारें,वो तख्त-ओ-ताज-ओ-महल
वो दरवाजे वो खिड़कियाँ और इंतज़ार की आस था मैं

रिश्तों के दायरों ने कुछ ऐसे जकड़ लिया था मुझे
समझ नही आता कितना अजनबी कितना ख़ास था मैं

कहीं तस्वीरें,कहीं अक्स तो कहीं परछाइयाँ दिखाई देती हैं तुझे
मेरा कोई वजूद नही जनता हूं,सिर्फ़ महज आभास था मैं

धरती पर आ गिरी निर्मल निवस्त्र चांदनी लेकिन
काले बादलों के रूप में चाँद का लिबास था मैं....

"अक्षय" निशब्द था मौन था तुम्ही बताओ मैं कौन था
क्या महज कोरे कागजों पे लिखा कोरा इतिहास था मैं
अक्षय-मन

36 टिप्‍पणियां:

  1. रिश्तो के दरार ----

    बहुत सुन्दर रचना भावपूर्ण

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  2. sunder ,bhav poorna kavita jo khasiyat hai tumhari.
    likhte rahna mujh sey door jaakar bhi.
    bahut bahut sneh.
    tumhara hi
    bhoopendra

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  3. ye to nahi pata kya they aap par dua hai yahi ki itihaas rach do aap.

    regards,

    Priya

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  4. Tumhi Shabd aur Tumhi Raag,
    Kore kaagaz pe likha jaanewala ek itihaas...

    Apne aap main paripurn ho tum...!

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  5. Waah Akshay...hameshaki tarah begtareen likha hai tumne...aur kya alag se kahun...meree ek saheli saath baithi hai hai aur uske moohme tareefon ke pul hai..!!

    http://shamasansmaran.blogspot.com

    http://aajtakyahantak-thelightbyalonelypath.blogspot.com

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  6. अक्षय जी बहुत ही अच्छी रचना है...शब्द और भावनाओं का अनूठा संगम है...ऐसे ही लिखते रहें...बधाई...
    नीरज

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  7. bahut hi gahan ahsason se saji rachna.............kahin bahut gahre duba le jati hai........adbhut.

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  8. रिश्तों के दायरों ने कुछ ऐसे जकड़ लिया था मुझे
    समझ नही आता कितना अजनबी कितना ख़ास था मैं

    bahut sundar rachana. badhaaee.

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  9. bahoot hi bhaavnatmak rachna hai ... bahoot dino baad aana huva ... aapki koi feed nahi mil rahi thee ...
    bahut lajawaab likha hai ...

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  10. नाम ने आकर्षित किया
    यहाँ आया तो तश्वीरों ने मन मोह लिया
    पढ़ा तो यही कहा-
    वाह! इस उम्र में ये इतने गहरे भाव!!
    खूबसूरत! खूबसूरत! खूबसूरत है सब!

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  11. वाह..वाह...बहुत खूब लिखा है।

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  12. बहुत सुन्दर लिखा है बेहतरीन रचना ...

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  13. teri dharti per palak ki anbhujzi pyas tha mai.. muje ye line 2 wajah se pasand aai kyu ki is mai ek to mera naam hai palak aur dusra ki ye kahi na khi mere emotions ko shabdo ka rup mila hai . anywaz bahot hi sunder rachna hai . aise hi likha kijiye aur hame uphaar diya kijiye ...
    palak

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  14. समझ नही आता कितना अजनबी कितना खास था मै.....
    अब सच कहूँ तो...... मुझे भी समझ नही आ रहा की कितनी पंक्तियों के लिए वाह लिखा दूँ......
    बेहतरीन इसको मै जरूर अपने मित्रो को सुनाऊंगा......

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  15. बहुत सुन्दर !
    घुघूती बासूती

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  16. करीब ना होते हुए भी करीब है तू....!!!! तुझे एहसास बन के रहने की आदत है...!!! न भुलाएं अतीत को.. न जीयें अतीत में.. तो बेहतर नज़र आएगा वर्तमान..
    बहुत अच्छी अभिव्यक्तियाँ हैं यह अक्षय है... इनपर समय की धुल मत पड़ने देना... इनका क्षय मत होने देना... !!!! आशीष मेरे प्यारे भाई को..

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  17. Akshay aapki poems really heart touching hoti hai, sorry I`m not poet so cant understand it so deeply. But this one was really good.

    You write really very good. Keep it up.

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  18. आपका चिंतन निसंदेह लाजवाब है, एकदम से अंतर्मन को छू लेने वाला। बधाई।

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  19. Bahut sunder aur bahwpoorna,manbhawan kavita visit kar pahut achchha laga....aapbahut achchha likhten hain likhte rahiye..!

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  20. sundar ati sundar
    lekhan ,shabdo ka chayan, dhara pravaah or bhaav sab kabil-e-tarif

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  21. लाजवाब, मनमोहक, बेहतरीन... खूबसूरत... नया साल आपको बहुत-बहुत मुबारक हो..

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  22. it`s nice
    not so much understanding but whatever i got it`s very nice

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  23. it`s nice
    not so much understanding but whatever i got it`s very nice

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  24. kale badlo me chand ka libaas hona..khud ko itihas btana kuch alag sa hai apki post me...

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  25. बहुत सुंदर रचना है।
    द्वीपांतर परिवार की ओर से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  26. बहुत ही सुंदर कविता कही। बधाई।

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  27. akshya nishabad tha main maun tha tumhi batao koun tha main,
    kya mehaj mere kore kagjo pe likha kora itihash tha main...........waah kya likha hai aapne..bahut achhi lagi aapki rachna...bahut khubsurat peshkash.........nishabad,,,,niruttar

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  28. कितनी तन्हाई,कितने थे आंसू कितना उदास था मैं
    तुझसे बिछड़ के तू ही बता दे कितना पास था मैं
    .....ek bar fir se padhi aapki kabita....or ykin manie is bar fir se waisi hi khubsurat lgi jaise pehle lgi thi........aai kal syad aapne likhna band kr dia hai.....likhte rahiye akshay....bahut logo ki trh mujhe v aapke rachnao ka intzar rhta hai.....aapki shuvchintak....

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