शनिवार, 30 जनवरी 2010

तस्वीर टूटे आईने की..


अँधेरी राहों से मैंने तुमको जब गुज़रते हुए देखा
चाँद कि परस्तिश में जैसे चांदनी को जलते हुए देखा

यूँ दिल में दबा नहीं सकते उन दहकते शोलों को
वो रंजिश-ओ-ग़म तेरी आँखों में सुलगते हुए देखा

वक़्त के साथ यूँ तो बढ़ जाएगी सासें मेरी
हर लम्हे को जिंदगी ने मगर,थमते हुए देखा

इस तन्हाई को तुम अब तन्हा ही रहने दो मौला
हमने खामोश समुन्द्रों को जलजलों में बदलते हुए देखा

कोई तपिश है या सुलगती आग सीने में कैद
सूरज को मैंने अश्को सा पिघलते हुए देखा

इन कागजों में दर्द को आखिर समेट लूँ कितना
मैंने जिंदगी को पन्नो कि तरहां बिखरते हुए देखा

अक्षय-मन

37 टिप्‍पणियां:

  1. इस तन्हाई को तुम अब तन्हा ही रहने दो मौला
    हमने खामोश समुन्द्रों को जलजलों में बदलते हुए देखा

    sahi baat akhi akshay..sorry bahut din bad yaha aa saki mein...
    bahuta chi lagi gazal

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  2. सोचती हूँ कैसे सूरज अश्को सा पिघलता होगा.समुन्दरो को जलज़लो में बदलना कैसा होगा.दर्द को कितना भी समेटो बिखर जाता है.

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  3. बेहतरीन रचना । अंतिम शेर तो लाजवाब है । आभार ।

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  4. हमने खामोश समुद्रों को जलजले में बदलते देखा ....
    कागज को दर्द में समेतु कैसे
    जिंदगी को पन्नों की तरह बिखरते देखा
    आह ....!!

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  5. कोई तपिश है सुलगती----- बहुत गहरे भाव लिये रचना के लिये बधाई

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  6. बहुत लाजवाब ग़ज़ल है ........... सूरत को पिघलते देखा ...... इस शेर में कमाल के ज़ज्बात हैं ....... गहरे भाव पिरोए हैं आपने ........

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  7. bahut hi sundar rachna hai..itni kam umra mai itni gahrayee....bhavo ki sundar prastuti....
    ishwar apko sukh samridhi or safalta den....

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  8. ज़िदगी को देखने का नज़रिया और गज़ल के सभी शेर बहुत सुन्दर.

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  9. भाई लाजवाब रचना है मिर्जा ग़ालिब साहब की। इतनी अच्छी रुबाइयां शाया करने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

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  10. yun to poori gazal hi lajawaab hai magar aakhiri ke dono sher bahut kuch kah jate hain.........bahut hi gahre utar gaye.....badhayi

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  11. इस तन्हाई को तुम अब तन्हा ही रहने दो मौला
    हमने खामोश समुन्द्रों को जलजलों में बदलते हुए देखा

    bahut bahut sunder sher

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  14. तन्हाई का दर्द ..समंदर के ज़लज़ले से कही अधिक है ....


    बहुत अच्छा लिखा है ..भावपूर्ण ..अति सुंदर

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  15. तन्हाई का दर्द ..समंदर के ज़लज़ले से कही अधिक है ....


    बहुत अच्छा लिखा है ..भावपूर्ण ..अति सुंदर

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  16. तन्हाई का दर्द ..समंदर के ज़लज़ले से कही अधिक है ....


    बहुत अच्छा लिखा है ..भावपूर्ण ..अति सुंदर

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  17. ati sundar rachana itni komalta itni gahrai samay mile to mujhe bhi padhna aap hi ka humumra hu

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  18. akshay bahut hi achchha likhate hain aap ek ke bad ek sabhi rachna bas padti chali gai mann ruka hi nahi.
    suman'meet'

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  19. Akshay!! U r simply great.......tumhare har shabd bolte hain.........:)

    check my blog..........."wo bachpan"
    http://jindagikeerahen.blogspot.com/

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  20. इन कागजों के दर्द को आखिर समेटूँ कितना....बहुत ही भावभरी प्यारी रचना जो सीधे दिल को छूती है....

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  21. इन कागजों में दर्द को आखिर समेट लूँ कितना
    मैंने जिंदगी को पन्नो कि तरहां बिखरते हुए देखा

    बहुत प्यारी गज़ल ..... बेहतरीन शेर

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  22. यूँ दिल में दबा नहीं सकते उन दहकते शोलों को
    वो रंजिश-ओ-ग़म तेरी आँखों में सुलगते हुए देखा

    वक़्त के साथ यूँ तो बढ़ जाएगी सासें मेरी
    हर लम्हे को जिंदगी ने मगर,थमते हुए देखा

    इस तन्हाई को तुम अब तन्हा ही रहने दो मौला
    हमने खामोश समुन्द्रों को जलजलों में बदलते हुए देखाkya kahu sab to aapn is kabita me keh dala hai ...bahut acchha likhte ho aap...achha laga padhke...good luck

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  23. in kagjo me dard ko aakhir samet loo kitana
    maine zindgi ko panno ki taraha bikhrte huye dekha hia
    Gahara matlab nikalta hai in laino ka
    aap mera sher bhi parhiye aur bataiye dono me fark
    Agar mumkin hai mahaz kagaj par likhkar dard bayna kar dena
    to kiyno na me kagaj par poori dawat urel doo

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