
खामोश पड़ी उन आवाज़ों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
तनहाइयाँ बटोरती उन दीवारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
तनहाइयाँ बटोरती उन दीवारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
बनती-बिगड़ती उन तकदीरों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
बिलगते बचपन की कुछ तस्वीरों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
भूख में हुए कुछ गुनाहों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
मुझको भटकाती जाती कुछ राहों ने मुझसे पूछा मैं कौन
दुनिया के उठते सवालों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
हवस के दहकते अंगारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
रातों को सजते बाज़ारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
फूलों से महके गजरों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
फूलों से महके गजरों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
प्रेम की असीमित पुकारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
प्रेमिका के मधुर स्वरों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
पायल की उन झंकारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
वीणा के उन तारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
अधखिली कलियों बहारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
उन गुलज़ार नजारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
दरिया के दोनों किनारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
प्रक्रति के भिन्न-भिन्न श्रंगारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
पहलुओं में सिमटे सितारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
जुगनुओं से रोशन अंधकारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
उन शब्द ,उन विचारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
उन कवियों, उन पत्रकारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
उन मंदिरों,उन गुरुद्वारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
उन मज्जिदों,उन उन मजारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
हिंसा,आतंक और अत्याचारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
नेता,अभिनेता और समाचारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं
"सवालों की चलती बरछी-कटारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं "
"कई सरगना गिरोह के सरदारों ने मुझसे पूछा मैं कौन हूं ":)
अक्षय-मन
अक्षय-मन


















बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
प्रत्युत्तर देंहटाएंढेर सारी शुभकामनायें.
संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com
ग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है
प्रत्युत्तर देंहटाएंजिसने जाना मै कौन हूँ
प्रत्युत्तर देंहटाएंसमझो स्वयम को पा लिया
फिर कुछ जानना शेष नही
फिर कुछ पाना शेष नही
इसी प्रश्न मे उलझी है दुनिया
फिर भी ना समझी है दुनिया
अति उत्तम रचना।
बहुत ही गहन आत्म-मंथन!
प्रत्युत्तर देंहटाएंकुंवर जी,
Wah,Akshay wah!
प्रत्युत्तर देंहटाएंबनती-बिगड़ती उन तकदीरों ने मुझसे पुछा मैं कौन हूं
प्रत्युत्तर देंहटाएंबिलगते बचपन की कुछ तस्वीरों ने मुझसे पुछा मैं कौन हूं
Jobhi likhte ho,jab bhi likte ho, gazab dhate ho!
Alfaaz tumhari gulami karte hain,lekhani salam karti hai..
'puchha' ke badle ' poochha' kar loge?Waise chand pe ek daag achhaa bhi lagta hai!
प्रत्युत्तर देंहटाएंBura to nahi mana?
me kon hun
प्रत्युत्तर देंहटाएंhar or se aawaj he me kon hun
aur jisane apane aap se poochha main kaun hun?
प्रत्युत्तर देंहटाएंvo hai" AKSHAY".jo itana khubsoorat sochata hai.bahut sunder abhivayakti.
bas ek hi shabd..lajawaab...
प्रत्युत्तर देंहटाएंgud one akshay
प्रत्युत्तर देंहटाएंek baar phir naye rang liye aaye ho
जब समझ आ जाये , कौन हो , तो हमें भी बता देना ....
प्रत्युत्तर देंहटाएंप्रशंसनीय ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंbahut badhiyan likha hai
प्रत्युत्तर देंहटाएंबेहतरीन प्रस्तुति
प्रत्युत्तर देंहटाएंअन्तर्मन को झकझोर के रख दिया आपने तो
आज से हम आपके फॉलोअर रहेगें
achchi lagi.
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