बुधवार, 24 सितंबर 2008

पहचान


है सामने आईने के अक्स मेरा बस आईना कोई और है
पहचान तो मेरी वही है बस पहचानने वाला कोई और है


धीरे-धीरे सुलगती पहचान मेरी ना बनी आतिश
ना धुआं बन गुम होती है
ये सजा है मेरी
ये गुनहा कोई और है
है मेरी पहचान क्या
ये बात कोई और है

मुझे मेरी पहचान ख़ुद नही उन खामोशियों,तनहाइयों ने
मुझको अपनी पहचान दी है
हालात क्या थे? मजबूरियां कौन सी थी ? किस्मत कैसी थी ?
मुझे क्या पता ये सवाल कोई और हैं
है मेरी पहचान क्या
ये बात कोई और है

जिंदगी के सफर मे हजारों चहरे मिले-जुले,पहचान हुई
पर अब कोई वास्ता नही,पाँव तो अपनी जगह हैं पर
अब कोई रास्ता नही
बदलती दुनिया के साथ पहचान बदली,जिस्म तो वही है
पर अब रूह कोई और है
है मेरी पहचान क्या
ये बात कोई और है

इतने आंसू बहा लिए कि मेरी पहचान भी बह गई वक़्त
के उस दरिया में
अब मैं हालात के बहाव में बहता हूं,थाम लें जो मुझको
वो किनारे कोई और हैं
है मेरी पहचान क्या
ये बात कोई और है

नाम तलाशता हूं क्यूंकि गुमनाम हूं
पहचान तलाशता हूं क्यूंकि अनजान हूं
हालत कोरे कागज़ सी मेरी ना कोई दास्तान,
ना कोई कहानी मेरी,जो पहचाने मुझको
वो कलम कोई और है
वो कलम कोई और है
है मेरी पहचान क्या
ये बात कोई और है
ये बात कोई और है ॥

12 टिप्‍पणियां:

  1. न जाने क्यों उतना मज़ा नहीं आया इस बारगी, जितना एनी सबही रचनाओं को पहले ही नज़र ने भा लिया.

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  2. "जिंदगी के सफर मे हजारों चहरे मिले-जुले,पहचान हुई
    पर अब कोई वास्ता नही,पाँव तो अपनी जगह हैं पर
    अब कोई रास्ता नही
    बदलती दुनिया के साथ पहचान बदली,जिस्म तो वही है
    पर अब रूह कोई और है
    है मेरी पहचान क्या
    ये बात कोई और है ।"

    ...Akshay bahut gahre se arthon ko utnee hi gudh shailee main likha hai bhayee......prawaah purn hai aur kaavvy main gambheerta hai....sundar!

    ..par aisa kyun...jindagee ka safar to aksar yunhi gujarta hai!
    manjil ek hotee hai, bas pal-pal kaarwaan badaltaa hai!!
    meel ke patharr bas kam ho nahi paate....
    raaston par chalte chalte aksar insaan bebas dam todta hai!!...Ehsaas!

    ..ye to jeewan ka falsafaa hai....par tumhaaree kavita behad sundar hai....

    ...AkshayEhsaas!

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  3. pahchaan kadam-dar-kadam banti rahti hai,hazaaron chehron me ek apna chahra hota hai,jo bhinn-bhinn rahon se gujarta,rota ek naye chahre me aata hai,jise aatma ki shakl kahte hai,
    bahut achhe shabdon ke saath badalti tasweeron ko ubhaara hai

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  4. नाम तलाशता हू क्योकि गुमनाम हू
    पहचान तलाशता हू क्योकि अनजान हू ...........
    .......ये बात कोई और है ..........





































    ज़बरदस्त....समझो तो सब कुछ न समझो तो ,,,,,,,,,,,,,,,,

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  5. खुद को तलाशती संवेदनशील रचना ..

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  6. बहत अच्छे.....लिखते रहें बस.....

    स-स्नेह
    गीता पंडित

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  7. वो कलम कोई और है...वाह...बेहतरीन रचना...अपने आप को पहचानने का प्रयास है...
    नीरज

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  8. bahut badiya mere dost ...
    itne aansu baha diye wala para bahut sahi hai , saari wyatha ko kah deta hai ...very good yaar ,
    keep it up
    God Bles you.

    Vijay

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  9. किसी को अश्क बहाते देखा पहली बार मेरे लिए .........
    देखकर मेरे भी अश्क आ गये .....................
    नींद टूटी तो पता चला की मेरे अश्क तो हकीक़त में थे .........
    किसी और के अश्क तो सपनो में ही समां गएँ ............................ Amit Raj Singh..(varanasi, BHU)

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