गुरुवार, 13 नवंबर 2008

बदले-बदले से कुछ पहलू


ख़ुद के लिए जो हर बात के माइने बदल देते हैं
नकाबों पे नकाब चढ़े हैं चहरे तो वही हैं पर वो
आईने बदल देते हैं !

वक्त की शाख़ पर यादों के पत्ते और आती-जाती हालातों की आँधियाँ
बिखरे-बिखरे से कुछ रिश्ते बीते लम्हों के जैसे,समेटने निकलूं गर,
वो अपने घर-घराने बदल देते हैं !

प्यार तो एक बुलबुला है ज़ज्बातों का एक बूंद भी सैलाब ले आएगी उसमे
ज़रा आंसुओं को थाम लो अपने कभी-कभी ये अश्क भी अफ़साने बदल देते हैं

उड़ते आसमां को छूने की ख्वाइश अगर ये रुके-रुके से कदम कर लें तो
कसूर नही अपना क्या कहें, तुफानो की आहट पे आसमां तो
आसमां लोग-बाग ज़माने बदल देते हैं

तुम साकी "अक्षय" को दोष ना दो नशे मे है वो या कहलो है मदहोश मोहब्बत मे
इसलिए तेरे लबों से जो छूकर आए वो झूठे पैमाने बदल देते हैं

अक्षय-मन

16 टिप्‍पणियां:

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  2. हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका हार्दिक स्वागत है। बहुत बढ़िया रचना है, नियमित लिखा करें।
    ॥दस्तक॥
    गीतों की महफिल
    तकनीकी दस्तक

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  3. bhai bahut dino baad tumhari koi poem itnii jyaada pasand aayi hai


    ab lag raha hai kii akshaya apane rang me fir se aa raha hai ..............

    manas ........
    weldone
    likhte raho ........

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  4. प्यार तो एक बुलबुला है ...बहुत पसंद आई आपकी यह रचना ..खुबसूरत भाव हैं इस के

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  5. yaar bahit sahi hai ,

    " ghar-gharane badal deten hai " ek dam cha gaye ho hero.. ..

    Good very good,

    regards

    vijay

    yaar , kabhi meri poems par kuch comments likh diya karo .

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  6. उङते आसमां को छूने की ख्वाहिश
    अगर ये रुके-रुके से कदम कर लें,
    तो कसूर नहीं अपना क्या कहें,
    तुफानों की आहट पे आसमां तो,
    आसमां लोग-बाग ज़माने बदल देते हैं।

    बहुत अच्छा लिखा है। वाह...

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  7. bikhre-bikhre se kuchh rishte....panktiyan to bahut hee achhee lagien.
    --ashok lav

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  10. Man ke bhavon ko itni gahrai se ootara hai aapne....padker achcha laga ...achcha likh lete hai aap...likhte rahiye....badhai....

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  11. बहुत सुंदर लिखा हैं! बधाई आपको! जारी रखें!

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