मंगलवार, 12 अगस्त 2008

जीवन



अब तुझसे कैसे कुछ कहूं
क्या तेरा है क्या मेरा है
कौनसी डगरिया पर जाना है
ना तू कुछ पूछे ना मैं बोलूं

बस तेरी ही आस्था अपने मन में बसाये
मैं तेरा ही जीवन व्यतीत कर रहा हूं
ना कुछ देकर जाउंगा ना कुछ लेकर आया हूं
मैं हूं तू या तू बन जाउं मैं, हैं एक मन में समाये

क्या विद्वान् क्या अज्ञानी सब हैं तो प्राणी
क्यूँ बने स्वार्थी, क्या ज्ञान भी कोई लुट पायेगा
दे दे इसे ना तो तेरा सारा ज्ञान व्यर्थ जाएगा
भेद-भावः क्यूँ करते फिर कैसी है इनकी वाणी

अरे! तेरे ये लोचन भरे हैं अश्रु और गम
तू कब तक ये अनमोल मोती लुटायेगा
लालची है दुनिया तू कब समझ पायेगा
छुपा इन मोतियों को ना तो लुटा जाएगा हर दम

मैं तेरा ही रूप हूं तेरा ही एक अंश हूं
बस मैं रात हूं, तू है सुबह से
बस मैं एक पल हूं, तू है समय से
ये जानकर भी अनजान मैं हूं,गुमनाम मैं हूं

आध्यात्मिक रूप लिए हूं परमात्मा की छबी हूं
ओ!बेसुध अशांति तू क्या भेद पाएगी मुझको
बता मुझसे क्या बिल्कुल डर नही तुझको
मैं मौन शस्त्र का धारक तेरा विनाशक हूं

क्या बुरा है क्या भला है सब जीवन के संग चला है
ना तू ये समझा पायेगा ना मैं कुछ समझ पाउंगा
जीवन के तराजू मे कर्म को तोल कर ही कुछ दे पाउंगा
सबको कुछ ना कुछ मिला है कोई ना खाली हाथ खड़ा है अक्षय-मन

6 टिप्‍पणियां:

  1. मैं तेरा ही रूप हूं तेरा ही एक अंश हूं
    बस मैं रात हूं, तू है सुबह से
    बस मैं एक पल हूं, तू है समय से
    ये जानकर भी अनजान मैं हूं,गुमनाम मैं हूं


    इतनी छोटी सी उम्र में
    इतनी बड़ी-बड़ी बातें

    विस्मित हूं....बहुत अच्छे..

    हमेशा आपका मन ऐसा ही रहे...

    शुभ-कामनाएं

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  2. आध्यात्मिक रूप लिए हूं परमात्मा की छबी हूं
    ओ!बेसुध अशांति तू क्या भेद पाएगी मुझको
    बता मुझसे क्या बिल्कुल डर नही तुझको
    मैं मौन शस्त्र का धारक तेरा विनाशक हूं
    excellent dost....shant rahkar hi ashanti ko door kiya ja sakta hai

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  3. बेहद उम्दा. इक नए फोम में. बेहतर पकड़. लिखते रहिये. शुभकामनायें.
    ---
    यहाँ भी आयें;
    उल्टा तीर
    उल्टा तीर (निष्कर्ष)

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  4. आध्यात्मिक रूप लिए हूं परमात्मा की छबी हूं
    ओ!बेसुध अशांति तू क्या भेद पाएगी मुझको
    बता मुझसे क्या बिल्कुल डर नही तुझको
    मैं मौन शस्त्र का धारक तेरा विनाशक हूं.......

    bahut gahraai hai,iski vivechna sirf dil me hi ho sakti hai,
    aashish lo

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