बुधवार, 13 अगस्त 2008



इन सपनो की वादी में आखें मेरी कल्पनाओं की उड़ान भरती हैं
इन नयनो की सीपी में आशाओं के मोती हैं

चित्त-चरित्र तथा चेकित(ज्ञानी) की चेतना
वस्तु-विचित्र तथा वाक्यों की व्यंजना
आकांक्षाओं की पूर्ति कर नए रूप को दर्शाती है !

भद्र-भला तथा भव्य भविष्य को भांपना
ममत्व-मनोरम तथा मर्यादा को मांपना
दुखो को दूर कर दबंग,वैभवशाली बनाती है !

शालीन-शमन(शान्ति) तथा शैशव(बचपन) सा शरमाना
कथनी-करनी तथा कुशल-कृतघ्नता की कल्पना
स्वार्थी ना बना हित्तोप्देश सुनाती हैं !

सजीव-संगति तथा सप्रेम संचित कर सदन सजाना
घनिष्ठ -घरेलु तथा एक घूंट में घमंड सारा पी जाना
ऐसे रिश्ते ऐसे नाते अक्षय-बंधन को अमृत पिलाती हैं !!

10 टिप्‍पणियां:

  1. सजीव-संगति तथा सप्रेम संचित कर सदन सजाना
    घनिष्ठ -घरेलु तथा एक घूंट में घमंड सारा पी जाना
    ऐसे रिश्ते ऐसे नाते अक्षय-बंधन को अमृत पिलाती हैं !!---बेहद उम्दा. फकत २ लाइने जीवन के इक पूरे हिस्से को सुगड बनाती हैं. सभी पंक्तियाप्रसंशनीय. बेहतर. लिखते रहिये.

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  2. साथी बहुत मंजु करीना में आपने महफूज कि निदा को पिरोया है.............

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  3. इन सपनो की वादी में आखें मेरी कल्पनाओं की उड़ान भरती हैं
    इन नयनो की सीपी में आशाओं के मोती हैं


    bahut khoob

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  4. bahut achha likha hai,par itne klisht shabdon ka chayan na karo,
    aam insaan bhi jise samajh le wahi likho......
    likhte rahe ho,aaj kuch kathin ho gaya.....

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  5. sahity ki mool dhara ke naksh-e-kadam pe sadhee huyee aur sa-sringaar ek aur behtar kavita ......

    ...Ehsaas

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  6. वाह.. क्या बात है.. अच्छी कविता है..!!
    बस इतनी शुद्ध हिंदी का प्रयोग ना किया करें कि केवल समीक्षकों के पढने के काबिल ही रहे..
    ऐसा शब्द चुनिए कि आम पाठक भी पढ़ कर समझ सके कि आपने कविता में कहा क्या है?
    जो लिखते समय आपके दिल में हो वही अर्थ पढने वाले के दिल में भी पढ़ते वक़्त होना चाहिए..
    बाकी पढ़ते वक़्त तो यही लगता है कि किसी बहुत बड़े आदमी कि कविता पढ़ रहा हूँ, यानी अगर आपकी फोटो प्रोफाइल में ना लगी हो तो आम पाठक यही समझेगा कि किसी वयस्क आदमी कि कविता पढ़ रहा है.. कहने का तात्पर्य ये है कि आपकी लेखनी में अनुभव कि कोई कमी नहीं होती.. बढ़िया है, इसी तरह लिखते रहिये..!!

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  7. अच्छे भाव....
    सुसंगठित भाषा

    लिखते रहें बस.....

    स-स्नेह
    गीता पंडित

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  8. Akshay, Gopal jee ne sahi kaha hai.....tumhari kavita sach main lagta hai kisi buddhe kavi (:P) ne likha hai.........tumhari andar hindi ke shabdo ki dictionery hai..well done dear!!

    mukesh sinha

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