बुधवार, 11 जून 2008

सपने


एक सपना क्षण भर में शायद सच हो जाये

वह कभी सपना था हकीक़त बन अचानक सामने आये

उस पल का एहेसास करके भी खुश हो लेता हूं

सपनो को साकार होने का सपना देख,

कभी-कभी मैं भी हवा में उड़ लेता हूं

ज़िन्दगी के हर दुःख,हर गम और इस

अकेलेपन को भी अपने सपनो में ही दूर कर लेता हूं

आँखों से टपके इन सपनो से अपनी प्यास बुझा लेता हूं

हाँ मैंने माना सपनो से मिलता नहीं है जीवन

लेकिन ये भी जाना सुखी जीवन का मिलता है एक आश्वासन

सपने एहेसास कराते हैं कुछ तो अपनेपन का

क्यूंकि यथार्थ तो अपना कोई हो नहीं सकता

सपने तो अमर हैं इन्हें कोई खो नहीं सकता

सपनो में हम डूब नहीं सकते फिर सपने देखना कहाँ बुरा है
आज इस युग में कोई भी सनकी हो जाये
यदि जीवन मैं कभी सपनो का सहारा न पाए

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