शनिवार, 10 मई 2008

कलयुग अवतार ..........

उन रोती हुई आँखों मैं क्या नज़र आता है
उन सोती हुई राहों मैं क्या नज़र आता है

उन आँखों मैं पेट की आग से बिलगती गरीबी दिखाई देती है
उन सोती राहों मैं गरीबी के साथ चलने की मज़बूरी दिखाई देती है

गरीबो का एक सपना होता है की वो कभी सपना न देखे
अगर देखे भी तो उसे साकार करने की उम्मीद न रखे
क्यूंकि
इस दरिद्र समाज के अंधी सोच वाले हम लोग उन्हें एक ऐसी दीमक समझते हैं जो देश को खोखला कर रही है

गरीबी की इससे बुरी हालत क्या हो सकती है...........

जब माँ बाहर होती है तो बेटी कुटिया मैं रो रही होती है
और जब बेटी बाहर होती है तो माँ कुटिया मैं नग्न पड़ी होती है.
जिसमे माँ और बेटी की फटी चादर मैं लिपटी अधनग्न तस्वीर नज़र आती है

गरीबी के सामने भगवान् भी छोटा नज़र आता है
कृष्ण भी सुदामा के चरण धोता नज़र आता है

इतने बड़े उदहारण के सामने भी गरीबी को श्राप समझा जाता है और फिर फटी चादर मैं लिपटाएक पूरा परिवार नज़र आता है

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