सोमवार, 12 मई 2008

तू मेरा नहीं पराया है

एक तमन्ना है तेरी पलके अपनी पलकों से मिलाने की
एक आरजू है तेरे आंसू अपनी पलकों पे सजाने की

एक कोशिश है तेरे गम अपने दिल मैं छुपाने की
एक साजिश है तेरी खुशियाँ तुझको लोटाने की
मगर
तेरी नज़र को उसका इंतज़ार आज भी है
गमो के समुन्दर मैं डूबने का अरमान तुझे आज भी है

अपने दिल के ज़ज्बातो को छुपाने की कोशिश तुझे आज भी है
उस पत्थर दिल का क्या जो तेरे मॅन को मोम समझता रहा

उस जलती लौ का क्या जो तुझे हमेशा पिग्लाती रही
उस बेरहम हंसी का क्या जो तेरे सुख मैं भी दुःख का एहेसास दिलाती रही

उस बदनसीब तकदीर का क्या जो तुझे तेरे अंधेरो से वाकिफ कराती रही
क्यूँ अपनी ही परछाइयों के पीछे भाग रही है तू
क्यूँ अपने बेदाग दामन पर दाग लगा रही है तू

तुझ पर अपनी खुशियाँ निसार करने को दिल चाहता है
तुझ पर अपने विश्वास को समर्पित करने को दिल चाहता है

तेरी आँखों से तेरी यादों को चुराने की आस आज भी है
अपने सपनो को तेरी आखो से देखने का इंतज़ार आज भी है
मगर
तेरी नज़र को उसका इंतज़ार आज भी है आज भी है...........

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