सोमवार, 26 जनवरी 2009

समंदर!!!


ये मेरा दिल है समंदर देखो
ये भी रोता है छूकर देखो !

पत्थरों से दोस्ती की सजा
लहरों से तुम पूछकर देखो !

तन्हाईयां फेली हैं मीलों तक
दो पल तुम ठहरकर देखो !

होसलों पर गर अपने हो यकीन
समंदर पर तुम चलकर देखो !

गहराईयों की तासीर गर मालूम न हो
मेरे दिल में तुम उतरकर देखो !

अक्षय-मन


7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत दिनो बाद पुराने अन्दाज़ की गज़ल देखी…………बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

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  2. बहुत सुन्दर रचना है। बधाई स्वीकारें।

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  3. बेहतरीन रचना..बधाई स्वीकारें

    नीरज

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  4. haushle par gar apne ho yakeen
    samandar par tum chal kar dekho......:)

    sahi hai bhai...waise ye shabd tere liye hi hai..tum bahut aage jaoge:)

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