होठों के आस पास ये इक टूटा जाम है …
-
*कोमा कहाँ लगेगा कहाँ पर विराम है.किसको पता प्रथम है के अंतिम प्रणाम है.घर
था मेरा तो नाम भी उस पर मेरा ही था,ईंटों की धड़कनों में मगर और...
5 दिन पहले
बहुत दिनो बाद पुराने अन्दाज़ की गज़ल देखी…………बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर रचना है। बधाई स्वीकारें।
जवाब देंहटाएंबेहतरीन रचना..बधाई स्वीकारें
जवाब देंहटाएंनीरज
how u honey?good post.keep wwriting,it will give u a new enjoyment of creativity.
जवाब देंहटाएंdr.bhoopendra
rewa
mp
haushle par gar apne ho yakeen
जवाब देंहटाएंsamandar par tum chal kar dekho......:)
sahi hai bhai...waise ye shabd tere liye hi hai..tum bahut aage jaoge:)
dil ko chhone wali rachnaen.
जवाब देंहटाएंbehtar disignining ke lie punah badhaee.
जवाब देंहटाएं