रविवार, 13 जुलाई 2008

कवि



मेरी बातें मेरे शब्द तुम तो समझते हो ना
मेरा अर्थ मेरे तथ्य तुम तो समझते हो ना

देखो तो ये मोन हैं एहेसास करो तो कलरव(मधुर ध्वनि)
कवि के इस मर्म को तुम तो समझते हो ना

मानो तो कल्पनाओं में विलीन हूं ना मानो तो अक्षरों से हीन
शब्दकोष हूं या हूं शून्य तुम तो समझते हो ना

पास आओगे तो हूं मैं मदिरा दूर से बादल वो बदिरा
मन से हूं मद या हूं तन से तरुण तुम तो समझते हो ना

मूंद नयन सुनोगे तो हैं शब्दों के शंख अन्यथा व्यर्थ हैं ये व्यंग्य
शकुन(सुनना)भी हूं मैं और हूं शमन(शांति)भी तुम तो समझते हो ना

चखोगे तो हूं रसराज गर पहेनोगे तो बनू श्रृंगार
मिठास भी हूं और हूं शब्दों के हार भी तुम तो समझते हो ना

शैली से हूं मैं शूर भेद सके ना कोई शूल
वेदवाक्य भी हूं और हूं विवेक भी तुम तो समझते हो ना

है गीत भी नहीं और ना है ग़ज़ल कवि की कविता है ये सरस-सरल
तब भी सुर-ताल भी हूं मैं और हूं संगीत भी तुम तो समझते हो ना
तुम तो समझते हो ना तुम तो समझते हो ना..........अक्षय-मन

5 टिप्‍पणियां:

  1. kavita khud itni mohak hai ki jo nahi samajhta wo bhi tumhare shabdon ke jaadoo se bach nahi paayega.......nasamjh ko bhee samajh main aa jayega..ki...kavi ki kalam.....sarwotamm hai

    ...Ehsaas!

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  2. मूंद नयन सुनोगे तो हैं शब्दों के शंख
    अन्यथा व्यर्थ हैं ये व्यंग्य

    waah.....bahut kuch...aur
    bahut sundar kaha......

    badhaaee....

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  3. समझता है हर कवि मन इन बातों को,
    क्योंकि-
    ये अनकही बातें बोलती हैं,
    मैंने इनको सुना है,
    समुद्र की लहरों सी होती हैं,
    शाख से कोई पत्ता गिरे ,
    ऐसा लगता है,
    ये अनकही बातें ,
    दिल की गहराई तक दस्तक देती हैं.......
    तुम इनको अनसुना नहीं कर सकते,
    ये दस्तक देती रहती है,
    मन की सांकलों को खोलो,
    सुनो.......
    अनकही बातें बोलती हैं! ........मन को छू लिया तुमने

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  4. kitni sunder lekhani hai ,mithaas hai ,man mohti hai...
    maun hai prakriti
    bolti hai khamoshi se
    geeton ki madhu lahri
    kaanon mei ras gholti hai
    aur kavi man ki udaan aisee ki
    aasmaan ke paar
    aur dharti ke tal ke
    saare raaz kholti hai
    maun hai fir bhi bolti hai.....

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  5. bahut sundar aur sarthak prastuti!!
    agar kavi ke dil se koi aawaj nikalti hai to wo aur bhi sumadhur lagti hai......tum bahut aage jaoge, mere bhai....!!!
    tumhara mann akshay hai....!!


    mukesh bhaiya

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